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रविवार, 30 जून 2013

जिंदगी को अब ऐसे ही चलते जाना है 
कुछ पाना है तो कुछ खोना है 

राहें बहुत है सामने मगर 
सही किसने पहचाना है 

बस धोखे फरेब छोड़कर
इंसानियत को ही अपनाना है

कांटे और फूल सा ये संसार है
कांटे को भी अब फूल बनाना है

बेगाना और अपना में क्या फर्क.?
अपनों ने अपनों को अपना जाना है...!!!

मंगलवार, 20 नवंबर 2012

रविवार, 29 जुलाई 2012

रात भर...


करके वादा कोई सो गया चैन से 
करवटें बदलते रहे हम रात भर !!१!!
हसरतें दिल में घुट-घुट के मरती रही 
और जनाज़े निकलते रहे रात भर !!२!!
रात भर चांदनी से लिपटे रहे वो 
हम अपने हाथ मलते रहे रात भर !!३!!
आबरू क्या बचाते वह गुलशन कि 
खुद कलियाँ मसलते रहे रात भर !!४!!
हमको पीने को एक कतरा भी न मिला 
और दौर पर दौर चलते रहे रात भर !!५!!
रौशनी हमें दे ना पाए यह चिराग अब 
यूँ तो कहने को वो जलते रहे रात भर !!६!!
छत में लेट टटोले हमने आसमान 
अश्क इन आँखों से ढलते रहे रात भर !!७!!
.........नीलकमल वैष्णव "अनिश".........